इजरायली हवाई हमले में यमन के हूती प्रधानमंत्री अहमद अल-रहावी की मौत | Israel Yemen Conflict 2025
29 अगस्त 2025 को इजरायली हवाई हमलों में यमन के हूती प्रधानमंत्री अहमद अल-रहावी की मौत। जानें इस घटना की पूरी सच्चाई और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया।

29 अगस्त 2025 को यमन की राजधानी सना (Sanaa) में हुए इजरायली हवाई हमलों ने एक बड़ी राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। इस हमले में ईरान समर्थित हूती सरकार के प्रधानमंत्री अहमद अल-रहावी (Ahmed al-Rahawi) की मौत हो गई। हूती अधिकारियों ने 30 अगस्त को आधिकारिक रूप से उनकी मौत की पुष्टि की।
हमले की पृष्ठभूमि
हूती विद्रोही समूह (Houthis) लंबे समय से यमन में सक्रिय है और ईरान का समर्थन प्राप्त करता है। हाल के दिनों में हूती लड़ाकों ने इजरायल और लाल सागर में जहाज़ों को निशाना बनाने के लिए मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
इजरायली सेना ने बयान जारी कर कहा कि सना में किया गया हवाई हमला इन्हीं गतिविधियों के जवाब में था। सेना का दावा है कि टारगेट किए गए स्थानों पर हूती नेतृत्व की मीटिंग चल रही थी।
अहमद अल-रहावी कौन थे?
- अहमद अल-रहावी हूती सरकार के प्रधानमंत्री थे।
- वे यमन की राजनीति में एक बड़ा चेहरा माने जाते थे और ईरान समर्थित नीतियों को आगे बढ़ाते थे।
- उनकी मौत हूती शासन के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
- Reuters और Associated Press जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने इस खबर की पुष्टि की है।
- Washington Post और अन्य प्रमुख समाचार पत्रों ने भी रिपोर्ट किया कि इस हमले में कई अन्य वरिष्ठ हूती नेता भी मारे गए।
- राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना के बाद मध्य पूर्व में संघर्ष और तेज़ हो सकता है।
आगे क्या?
हूती समूह पहले ही इजरायल के खिलाफ अपने हमले तेज़ करने की चेतावनी दे चुका है। ऐसे में अहमद अल-रहावी की मौत के बाद यमन में सत्ता संतुलन और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहरा असर पड़ने की संभावना है।
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