बीकानेर: छत्तरगढ़ में वन भूमि से अवैध कब्जे हटाने का बड़ा अभियान शुरू, सैकड़ों बीघा जमीन हुई मुक्त
बीकानेर जिले के छत्तरगढ़ क्षेत्र में वन विभाग ने लंबे समय से चले आ रहे अवैध अतिक्रमण और कब्जों के खिलाफ सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। विभाग की टीम ने शुक्रवार से बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की, जिसमें सैकड़ों बीघा वन भूमि पर की गई अवैध खेती और अतिक्रमण को हटाया जा रहा है। यह अभियान छत्तरगढ़ वन मंडल के अंतर्गत विशेष रूप से चलाया जा रहा है और आने वाले दिनों में इसे पूरे मंडल की सभी रेंजों तक विस्तार दिया जाएगा। इसका उद्देश्य वन भूमि को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त करना है।
कार्रवाई की शुरुआत और विवरण जिला वन अधिकारी दिलीप सिंह राठौड़ के निर्देशन में यह अभियान चलाया जा रहा है। दंतौर के सहायक वन संरक्षक सूर्य प्रताप सिंह और दंतौर रेंजर भैरवेंद्र सिंह की अगुवाई वाली टीम ने सबसे पहले 66 आरडी क्षेत्र में कार्रवाई की। यहां 11 बीएलडी, 3 एसडब्ल्यूएम और 4 एसडब्ल्यूएम क्षेत्रों में वन भूमि पर हो रहे अवैध काश्त (खेती) और अतिक्रमण को चिह्नित किया गया। इसके बाद तुरंत कब्जे हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।जिला वन अधिकारी दिलीप सिंह राठौड़ ने बताया कि छत्तरगढ़ वन मंडल की दंतौर रेंज में अवैध अतिक्रमण और काश्त के खिलाफ यह विशेष अभियान शुरू किया गया है। अभियान के तहत वन भूमि पर मौजूद सभी प्रकार के अतिक्रमणों को चिह्नित कर संबंधित लोगों को बेदखल किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और जल्द ही छत्तरगढ़ वन मंडल की सभी रेंजों में इसी तरह का अभियान चलाकर पूरी वन भूमि को मुक्त कराया जाएगा।
अतिक्रमणकारियों में हड़कंप वन विभाग की इस अचानक और तेज़ कार्रवाई से अवैध कब्जेदारों में हड़कंप मच गया है। टीम मौके पर लगातार सक्रिय है, जिससे कई जगहों पर अवैध रूप से की जा रही खेती को रोक दिया गया है। अभियान में रेंज स्टाफ के साथ वनरक्षक राम सिंह, रामदयाल, धर्माराम, श्रवण चौधरी, सुनील कुमार, राकेश कुमार, रामलाल सहित कई अन्य कर्मचारी शामिल रहे।
लंबे समय से चल रही थीं शिकायतें छत्तरगढ़ सहित बीकानेर जिले के कई क्षेत्रों में वन विभाग की जमीन पर वर्षों से अवैध काश्त हो रही थी। खेतों से सटी वन भूमि पर लोग फसलें बोते थे और उत्पादन लेते थे, लेकिन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगने दी जाती थी। विभाग को इस संबंध में लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिनके आधार पर अब यह सख्त कदम उठाया गया है। यह अभियान न केवल वन संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और सरकारी भूमि की रक्षा करने की दिशा में एक मजबूत पहल है।यह कार्रवाई राजस्थान में वन भूमि अतिक्रमण के खिलाफ चल रहे व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। विभाग का कहना है कि ऐसे अभियान नियमित रूप से चलते रहेंगे ताकि भविष्य में कोई नया अतिक्रमण न हो सके। स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे वन भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा न करें और विभाग के साथ सहयोग करें।
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