राजस्थान में विधायक निधि से जुड़े भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप: विधायकों के बाद अधिकारियों पर भी कमीशन मांगने का खुलासा

Dec 15, 2025 - 15:05
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राजस्थान में विधायक निधि से जुड़े भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप: विधायकों के बाद अधिकारियों पर भी कमीशन मांगने का खुलासा

राजस्थान में विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (MLA LAD) से विकास कार्यों की अनुशंसा के बदले कमीशन मांगने के आरोपों ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। हालिया जांच रिपोर्ट में खींवसर से भाजपा विधायक रेवंतराम डांगा, हिंडौन से कांग्रेस विधायक अनीता जाटव और बयाना (भरतपुर) से निर्दलीय विधायक ऋतु बनावत पर गंभीर आरोप लगे हैं। इन आरोपों के अनुसार, ये विधायक विकास कार्यों की अनुशंसा के एवज में 40 प्रतिशत तक कमीशन की मांग कर रहे थे।यह खेल विधायकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकारी अधिकारियों तक भी पहुंच गया। आरोप है कि विधायकों की अनुशंसा पत्र लेकर अधिकारियों के पास पहुंचने पर उन्होंने भी अपना हिस्सा मांगा। कुछ मामलों में अधिकारियों ने 10 प्रतिशत कमीशन पर सहमति जताई, जबकि एक अधिकारी ने कमीशन के साथ अतिरिक्त सामान भी मांग लिया।

विधायकों पर लगे आरोपों का विवरण एक स्टिंग ऑपरेशन के आधार पर सामने आए इन आरोपों में:भाजपा विधायक रेवंतराम डांगा ने कथित तौर पर 50 लाख रुपये के कार्य के बदले 40 प्रतिशत कमीशन मांगा। कांग्रेस विधायक अनीता जाटव ने 50 हजार रुपये लेकर 80 लाख रुपये के कार्य की अनुशंसा पत्र जारी किया। निर्दलीय विधायक ऋतु बनावत के पति ने 40 लाख रुपये की डील कथित रूप से फाइनल की। ये अनुशंसा मुख्य रूप से सरकारी स्कूलों में कारपेट (दरी-फर्श) सप्लाई से जुड़ी थी। तीनों विधायकों से जुड़े कार्यों की कुल राशि करीब 1.70 करोड़ रुपये बताई गई है।

अधिकारियों की भूमिका और कमीशन की मांग विधायकों की अनुशंसा पत्र लेकर जब संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया गया तो उन्होंने भी कमीशन की बात की:करौली के जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) पुष्पेंद्र शर्मा से अनीता जाटव का 80 लाख रुपये का पत्र दिखाने पर उन्होंने कहा कि जो लिखना है बता दें और कार्य कर देंगे। अंत में 10 प्रतिशत कमीशन पर सहमति बनी। मूंडवा के मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (सीबीईओ) कैलाशराम से डांगा का पत्र दिखाने पर उन्होंने अपना फायदा पूछा। 5 प्रतिशत कमीशन पर सहमत होने के बाद उन्होंने घर के लिए एक दरी भी मांग ली। इन बातचीतों के वीडियो कथित रूप से उपलब्ध हैं, जो कमीशनखोरी के इस सिस्टम को उजागर करते हैं। प्रक्रिया के अनुसार, विधायक की अनुशंसा पर प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद कार्यकारी एजेंसी (जैसे ब्लॉक शिक्षा अधिकारी या जिला शिक्षा अधिकारी) पूरा कार्य संभालती है।

कार्यों की गुणवत्ता और मुनाफे का खेल चौंकाने वाली बात यह है कि अनुशंसा किए गए कार्यों में लागत को जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया। उदाहरण के लिए:12x15 फीट के एक कारपेट की अनुशंसा 25 हजार रुपये की दर से की गई, जबकि बाजार में इसकी वास्तविक कीमत मात्र 5,700 रुपये है। इससे कमीशन बांटने के बाद भी सप्लायर को 20 प्रतिशत मुनाफा बच जाता है, जबकि वास्तविक कार्य पर केवल 30 प्रतिशत राशि खर्च होती है।कुल मिलाकर, जनता के पैसे का 70 प्रतिशत कमीशन और मुनाफे में चला जाता है। 

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