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Dussehra 2023: शुभ योग में करें दशहरा पूजन, जीवन में होगा कल्याण, जानें कब होगा रावण दहन, शस्त्र पूजा का मुहूर्त और महत्व

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दशहरा 2023: शुभ योग में करें दशहरा पूजन, जीवन में होगा कल्याण

हिंदू धर्म में दशहरा का विशेष महत्व है। इसे विजयादशमी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध किया था। इसलिए इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है। इस साल दशहरा 24 अक्टूबर, मंगलवार को मनाया जाएगा। इस दिन रवि योग और वृद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है। ऐसे में दशहरा पूजन और रावण दहन का विशेष महत्व है।

Dussehra 2023:दशहरा पूजन का शुभ मुहूर्त

दशहरा पूजन का शुभ मुहूर्त 24 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 19 मिनट से 3 बजकर 37 मिनट तक है। इस मुहूर्त में विधि-विधान से दशहरा पूजन करने से व्यक्ति को जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण प्राप्त होता है।शास्त्रों के मुताबिक, दशहरा पर शस्त्र पूजा विजय मुहूर्त में करने का विधान है. ऐसे में 24 अक्टूबर को दशहरा पर शस्त्र पूजा का शुभ समय दोपहर 11:26 बजे से दोपहर 12:39 बजे तक है. वैदिक विधि विधान से पूजा करने से मंगल का प्रभाव मंगल ही प्रदान करता है कभी भी मंगल अमंगल नहीं होता है.

Dussehra 2023:रावण दहन का शुभ मुहूर्त

रावण दहन का शुभ मुहूर्त 24 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 20 मिनट से 3 बजकर 37 मिनट तक है। इस मुहूर्त में रावण, कुंभकरण और मेघनाद का दहन करने से व्यक्ति के जीवन से सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं।देशभर में दशहरा के दिन रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है. इसके बाद लोग बुराई पर अच्छाई का जीत जश्न मनाते हैं. बता दें कि, इस साल 24 अक्टूबर को दशहरा पर रावण दहन का मुहूर्त सूर्यास्त से लेकर ढाई घंटे तक होगा. हालांकि, दशहरा पर सूर्यास्त शाम 05:43 बजे होगा. रावण का दहन प्रदोष काल में करने का विधान है. प्रदोष काल सूर्यास्त से लेकर ढाई घंटे तक माना जाता है.

Dussehra 2023:शस्त्र पूजा का महत्व

दशहरा के दिन शस्त्र पूजा का भी विशेष महत्व है। इस दिन शस्त्रों की पूजा करने से व्यक्ति को शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। साथ ही, शस्त्रों की आयु भी बढ़ती है।

Dussehra 2023:शस्त्र पूजा का शुभ मुहूर्त

शास्त्रों के मुताबिक, दशहरा पर शस्त्र पूजा विजय मुहूर्त में करने का विधान है. ऐसे में 24 अक्टूबर को दशहरा पर शस्त्र पूजा का शुभ समय दोपहर 11:26 बजे से दोपहर 12:39 बजे तक है. वैदिक विधि विधान से पूजा करने से मंगल का प्रभाव मंगल ही प्रदान करता है कभी भी मंगल अमंगल नहीं होता है.

Dussehra 2023:दशहरा पूजन की विधि

दशहरा पूजन की विधि निम्नलिखित है:

* सबसे पहले घर को साफ-सुथरा कर लें।

* फिर, पूजा स्थल पर भगवान श्रीराम, माता सीता, भगवान लक्ष्मण और हनुमान जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।

* इसके बाद, भगवान श्रीराम को पंचामृत, रोली, अक्षत, धूप, दीप, फूल, फल और मिठाई अर्पित करें।

* फिर, माता सीता, भगवान लक्ष्मण और हनुमान जी को भी पंचामृत, रोली, अक्षत, धूप, दीप, फूल, फल और मिठाई अर्पित करें।

* इसके बाद, रावण, कुंभकरण और मेघनाद की प्रतिमा या तस्वीरों को जलाएं।

* अंत में, प्रसाद वितरित करें और आरती करें।

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