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गहलोत के ज्यूडिशियरी पर दिए बयान से वकीलों में गुस्सा:मुख्यमंत्री के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर की याचिका

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गहलोत के ज्यूडिशियरी पर दिए बयान से वकीलों में गुस्सा:मुख्यमंत्री के खिलाफ हाईकोर्ट में दायर की याचिका, सीजे को लिखा लेटर; पुतला भी जलाया

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ज्यूडिशियरी को लेकर दिए गए बयान से बवाल मच गया है। गहलोत के बयान से वकीलों में गुस्सा है। न्यायिक जगत से भी गहलोत के बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। वकीलों ने हाईकोर्ट परिसर में बयान के विरोध में गहलोत का पुतला भी जलाया।

सीएम गहलोत के बयान के बाद उनके खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर हो गई है। संभवत: इस पर हाईकोर्ट अगले सप्ताह सुनवाई करेगा। वहीं बार काउंसिल के पूर्व उपाध्यक्ष ने सीजे को लैटर लिखकर गहलोत के खिलाफ प्रसंज्ञान लेने का आग्रह किया है।

पीआईएल दायर, कहा- गहलोत के खिलाफ हो कार्रवाई

हाईकोर्ट में पीआईएल दायर करने वाले वकील शिवचरण गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का यह बयान न्यायपालिका को शर्मसार करने वाला हैं। यह न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को धूमिल करता है।

गहलोत का यह बयान अवमानना की परिभाषा में आता है, इसलिए हाईकोर्ट संविधान के अनुच्छेद 215 के तहत प्रसंज्ञान लेकर अवमानना कर्ता को दंडित करें। वहीं अदालत से मामले की जल्द सुनवाई का भी आग्रह किया।

हाईकोर्ट में वकीलों ने जलाया गहलोत का पुतला

सीएम गहलोत के बयान के विरोध में हाईकोर्ट परिसर में वकीलों ने उनका पुतला जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। वकीलों की मांग है कि गहलोत तुरंत अपने बयान के लिए माफी मांगे। बयान के विरोध में वकील गांधी प्रतिमा के पास एकत्रित हुए। यहां उन्होंने सीएम गहलोत के खिलाफ नारेबाजी की और उनका पुतला जलाया। अचानक हुए इस घटनाक्रम के बाद हाईकोर्ट में सुरक्षा इंचार्ज सुमेर सिंह ने मौके पर पुलिस जाब्ता तैनात कर दिया।

बीसीआर के पूर्व उपाध्यक्ष ने मुख्य न्यायाधीश को लिखा पत्र

सीएम अशोक गहलोत के इस बयान के बाद प्रदेश में अब वकील भी उनके खिलाफ लामबंद हो रहे हैं। बीसीआर के पूर्व उपाध्यक्ष योगेन्द्र सिंह तंवर ने इसे लेकर राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को शिकायती पत्र लिखा है।

इसमें उन्होंने लिखा- गहलोत ने न्यायपालिका पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए सार्वजनिक रूप से बयान दिए हैं। इससे न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। ये अपमानजनक टिप्पणियां न केवल न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाती हैं बल्कि कानूनी प्रणाली के सुचारू कामकाज में भी बाधा डालती है। उन्होंने आग्रह किया कि मुख्य न्यायाधीश इस पत्र को आपराधिक शिकायत के रूप में दर्ज करते हुए मामले में प्रसंज्ञान लेंवे।

गहलोत ने कहा था ज्यूडिशियरी में भयंकर भ्रष्टाचार

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को मीडिया से बात करते हुए कहा था कि ज्यूडिशियरी में भयंकर भ्रष्टाचार हो रहा है। मैंने सुना है कि कई वकील तो जजमेंट लिखकर ले जाते हैं। वही जजमेंट आता है। ज्यूडिशियरी के अंदर यह क्या हो रहा है? चाहे लोअर ज्यूडिशियरी हो या अपर। हालात गंभीर हैं। देशवासियों को सोचना चाहिए।

उन्होंने कहा- भाजपा विधायक कैलाश मेघवाल ने केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल पर जो आरोप लगाए हैं। वो सही हैं। मुझे मालूम पड़ा है कि उनके (अर्जुन राम मेघवाल) वक्त बहुत बड़ा करप्शन हुआ था। उसे दबा दिया गया है। इन लोगों ने हाईकोर्ट से स्टे ले रखा है।

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